जनसूचना: सूचना न देना सीएमओ को पड़ सकता है भारी, लग सकता है जुर्माना

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जनसूचना कार्यकर्ता की शिकायत पर राज्य सूचना आयुक्त ने मांगा था जवाब

सीएमओ को मिला समय, नहीं दिया जवाब तो लग सकता है जुर्माना

अयोध्या। जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचना का जवाब तय समय पर न देने व राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष हाजिर न होना जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भारी पड़ सकता है। हालांकि उन्हें 9 जून को हुई सुनवाई में अभी भी कुछ अंतिम अवसर के साथ अतिरिक्त समय दिया गया है, ताकि वे राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष हाजिर हो सकें, यदि ऐसा नहीं हुआ तो उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आरटीआई कार्यकर्ता अभिषेक सावंत की ओर से जन सूचना अधिकार के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से एम्बुलेंस सहित अन्य बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से एम्बुलेंस की संख्या, उनकी फिटनेस सहित अन्य बिंदुओं प सूचना मांगी गई थी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर अभी तक कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने राज्य सूचना आयुक्त से शिकायत की थी। जिस पर अपील संख्या एस-11-ए- 2176/2025 अभिषेक सावंत बनाम ज. सू.अ. कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी के राज्य सुचना आयुक्त वीरेन्द्र प्रताप सिंह के समक्ष हाजिर नहीं होने से नाराज राज्य सुचना आयुक्त ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अंतिम तारीख 9 जून देते हुए स्पष्ट किया कि अगर तय दिनांक को अगर सीएमओ आयोध्या पेश नहीं होते हैं तो उन्हें अर्थ दंड के रूप मे 25000 हजार का जुर्माना भरना होगा।

पत्र मे बताया गया हैं कि अपीलार्थी अभिषेक सावंत वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। विपक्षी जनसूचना अधिकारी कार्यालय मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से कोई नहीं उपस्थित है। इस प्रकरण में अपीलार्थी ने जिला चिकित्सालय, अयोध्या में उपलब्ध एम्बुलेंस वाहनों के पंजीकरण, मॉडल, निर्माण वर्ष आदि के सम्बन्ध में सूचनाएं मांगी है। जनसूचना अधिकारी ने अभी तक कोई भी सूचना नहीं उपलब्ध कराई है।

प्रश्नगत मामले में गत सुनवाई 12.01.2026 को जनसूचना अधिकारी, कार्यालय मुख्य चिकित्साधिकारी को इस आशय की नोटिस निर्गत की गयी थी कि अपीलार्थी को वांछित सूचनाएं 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराते हुए अनुपालन आख्या अगली सुनवाई तिथि पर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें, अन्यथा उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 (1) के अन्तर्गत रु0 25,000/- का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जाएगा।

किन्तु आज सुनवाई के दौरान जनसूचना अधिकारी न तो उपस्थित है और न ही उनका कोई लिखित अभिकथन पत्रावली पर उपलब्ध है। यह स्थिति अत्यन्त आपत्ति जनक है। अभिषेक सावंत ने बताया कि राज्य सूचना आयुक्त की ओर से जनसूचना अधिकारी कार्यालय मुख्य चिकित्साधिकारी को अन्तिम अवसर प्रदान करते हुए अपीलार्थी का मूल आवेदन पत्र संलग्न कर इस आशय की नोटिस निर्गत की जाए कि अपीलार्थी को वांछित सूचनाएं 15 दिन के भीतर टेबलफार्म में बिन्दुवार सूचनाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें (यदि संलग्नक है तो साथ में संलग्न करें) एवं कृत कार्यवाही से आयोग को भी अवगत कराएं अन्यथा उनके विरुद्ध “सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005” की धारा 20 (1) के अन्तर्गत रु० 25,000/- का अर्थदण्ड अधिरोपित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, इसके लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे।

आरटीआई कार्यकर्ता अभिषेक सावंत का कहना है कि “एंबुलेंस की सूचना न देना एक बड़े घोटाला है, परिवहन विभाग को इनके सभी वाहनों की जांच करनी चाहिए, जिससे आम जनमानस किसी दुर्घटना के होने पर अपना बीमा का रिनिवल फाइल कर सके। अगर किसी एंबुलैंस का बीमा या फिटनेस नहीं है तो दुर्घटना में घायल द्वितीय पक्ष को एक रुपए का भी क्लेम नहीं मिलेगा।”

अभिषेक सावंत,आरटीआई कार्यकर्ता


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