शासनादेश जारी: प्रदेश के सरकारी वकीलों की फीस में बढ़ोतरी

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सांकेतिक फोटो

प्रदेश के सरकारी वकीलों की फीस में बढ़ोतरी का शासनादेश जारी, देखें अब कितनी मिलेगी फीस

अयोध्या। उत्तर प्रदेश में विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के बीच शासन ने वकीलों की फीस में बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया। मंगलवार को ही कैबिनेट में सरकार ने इस फैसले को मंजूरी दी थी। शासनादेश जारी होने के बाद एक दशक बाद सरकारी वकीलों को बढ़ी हुई फीस मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

शासन के प्रमुख सचिव न्याय उदय प्रताप सिंह की ओर से प्रदेश सरकार के राज्य स्तर पर विभिन्न स्तरों पर कार्यरत सरकारी अधिवक्ताओं की फीस में बढ़ोतरी का आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनर फीस अब 14,000 रुपये प्रतिमाह और बहस फीस 2,500 रुपये प्रति कार्य दिवस दी जाएगी। वहीं अपर जिला शासकीय अधिवक्ता को 11,000 रुपये मासिक और 2,300 रुपये प्रति दिवस का मानदेय भुगतान होगा। शासन की ओर से सहायक और उप जिला शासकीय अधिवक्ताओं के भुगतान में भी वृद्धि की गई है।

हाई कोर्ट में अब इतना मिलेगा वकील को

उच्च न्यायालय में कार्यरत मुख्य स्थायी अधिवक्ता/लोक अभियोजक को अब 35,000 रुपये मासिक और 12,000 रुपये प्रति दिन बहस फीस मिलेगी। जबकि अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को 20,000 रुपये मासिक और 8,000 रुपये प्रतिदिन बहस का दिया जाएगा। उधर अन्य श्रेणी के अधिवक्ताओं की फीस भी संशोधित हुई है। महाधिवक्ता की रिटेनर फीस 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह और बहस फीस 60,000 रुपये प्रति कार्य दिवस निर्धारित की गई है। जबकि अपर महाधिवक्ताओं को उच्च न्यायालय में 40,000 रुपये तथा सर्वोच्च न्यायालय में 50,000 रुपये प्रति दिवस बहस फीस का भुगतान होगा।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता की भी बड़ी फीस

जारी शासनादेश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को 30,000 रुपये मासिक और 15,000 रुपये प्रतिदिन बहस फीस मिलेगी। विशेष और वरिष्ठ पैनल अधिवक्ताओं के लिए भी प्रति दिवस अधिकतम फीस की सीमा तय कर दी गई है।


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