
अयोध्या। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट सुरेन्द्र मोहन सहाय ने शुक्रवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान रुदौली क्षेत्र में हुए दंगे के मामले में विधायक रामचंदर यादव के खिलाफ मुकदमा वापस लेने का आदेश दिया है। इस बाबत इसी माह चार मई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने विधायक की याचिका पर कार्यवाही समाप्त करने का आदेश पारित किया था।
लोक अभियोजक ज्ञानेश चंद्र पांडेय और रोहित पांडेय के मुताबिक 24 अक्टूबर 2012 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान रुदौली थाना क्षेत्र में बवाल हुआ था। आरोप था कि भीड़ ने जानलेवा हमला किया,दूसरे संप्रदाय के लोगों का घर फंकने का प्रयास किया,प्राण घातक हमला हुआ और सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाया गया। जिसमें पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।
मामले में रुदौली थाना के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक योगेन्द्र प्रताप सिंह ने भाजपा विधायक रामचन्दर यादव समेत 20 के खिलाफ बलवा,जानलेवा हमला,मारपीट,आगजनी,गाली गलौच,धमकी,साजिश,क्रिमिनल लॉ एमेन्डमेंट एक्ट तथा लोक सम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा में दर्ज कराया था। मामले में विवेचक ने सभी आरोपियों केे खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
भाजपा सरकार ने वर्ष 2020 में मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया था। हालांकि लोकनाभियोजक की ओर से मुकदमा वापसी के आदेश के लिए मामले को विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट तीन की अदालत में प्रस्तुत किया गया तो अदालत ने 16 दिसंबर 22 को अभियोजन वापसी की याचिका को अस्वीकार कर दिया और मामले के विचारण का आदेश पारित किया।
जिसके खिलाफ विधायक ने हाईकोर्ट में रिवीजन दाखिल की और हाई कोर्ट ने रिवीजन को स्वीकार करते हुए चार मई को अभियोजन वापस लेने का आदेश दिया था। शुक्रवार को विशेष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में विधायक की याचिका पर आदेश पारित किया है।

