रामकथा संग्रहालय में लगेगी भगवान राम के पूर्वजों की प्रतिमाएं….

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रामकथा संग्रहालय 

गौरवशाली इतिहास के बारे में मिलेगी डिजिटल जानकारी, प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर भी मंथन जारी

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में अब भगवान श्रीराम के पूर्वजों और इक्ष्वाकु वंश की प्रतिमाएं स्थापित नहीं की जाएंगी बल्कि मूर्तियों और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियों को अब निर्माणाधीन इंटरनेशनल रामकृष्ण म्यूजियम में स्थान दिया जाएगा। जहां श्रद्धालुओं को इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजाओं की मूर्तियों के साथ उनकी वंशावली और गौरवशाली इतिहास की डिजिटल जानकारी भी मिलेगी।
रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि इक्ष्वाकु वंश की वंशावली बेहद विस्तृत है, इसलिए सभी राजाओं को शामिल करना संभव नहीं होगा। हालांकि, उन प्रमुख विभूतियों को अवश्य स्थान दिया जाएगा जिनकी पहचान भारतीय संस्कृति में आज भी अमिट है।

हरिश्चंद्र से भगीरथ तक की कथाएं होंगी प्रदर्शित
उन्होंने बताया कि गैलरी में सतयुग से लेकर त्रेता, द्वापर और कलियुग तक इक्ष्वाकु वंश की परंपरा को दर्शाया जाएगा। इसमें सत्य और धर्म के प्रतीक राजा हरिश्चंद्र धर्मपरायण सम्राट दिलीप, महाराज रघु और मां गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले महाराज भगीरथ की कथाओं को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। राजा दिलीप की नंदिनी गाय की सेवा, पुत्र रघु के जन्म और रघुवंश की स्थापना की कथा भी संग्रहालय का हिस्सा होगी। इसी रघुवंश की मर्यादा को भगवान राम ने “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई” कहकर अमर बनाया था। महाराज रघु की दानवीरता की कथा भी होगी शामिल, संग्रहालय में महाराज रघु की दानवीरता से जुड़ी स्वर्ण वर्षा की प्रसिद्ध कथा भी प्रदर्शित की जाएगी।मान्यता के अनुसार, ब्रह्मचारी कौत्स गुरु दक्षिणा के लिए नौ हजार स्वर्ण मुद्राओं की मांग लेकर महाराज रघु के पास पहुंचे थे। उस समय महाराज रघु तपस्वी जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन उन्होंने रघुवंश की परंपरा निभाते हुए किसी याचक को खाली हाथ लौटाने से इनकार कर दिया। कथा के अनुसार, जब धन के देवता कुबेर ने सहायता नहीं की, तो महाराज रघु ने उन पर चढ़ाई की तैयारी कर दी। इससे भयभीत होकर कुबेर ने स्वर्ण वर्षा कर दी। बताया जाता है कि महाराज रघु ने पूरा स्वर्ण कौत्स को अर्पित कर दिया, हालांकि कौत्स ने केवल नौ हजार स्वर्ण मुद्राएं ही स्वीकार की। इसी घटना के बाद वह स्थान “स्वर्ण खनि कुंड” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

इक्ष्वाकु वंश के लिए बनेगी विशेष गैलरी
रामकथा संग्रहालय में तैयार हो रही 20 गैलरियों में से एक विशेष गैलरी इक्ष्वाकु वंश को समर्पित होगी।
श्री राम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संग्रहालय प्रशासन फिलहाल उन राजाओं के चयन में जुटा है, जिनकी कीर्ति, पराक्रम और धार्मिक योगदान आज भी जनमानस में जीवित हैं। साथ ही उनकी प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर भी मंथन चल रहा है।

डिजिटल कियोस्क से मिलेगा सूर्यवंश का इतिहास

रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ संदीप कुमार सिंह ने बताया कि गैलरी में आधुनिक डिजिटल कियोस्क लगाए जाएंगे। इनके जरिए श्रद्धालु सूर्यवंशी राजाओं के इतिहास, उनके पराक्रम और धार्मिक परंपराओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।


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