
सावन का आखिरी सोमवार: शिवमय हुई अयोध्या, नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ सहित शिवालयों मे उमड़ी आस्था
अयोध्या। सावन के आखिरी सोमवार पर रामनगरी अयोध्या पूरी तरह शिवमय नजर आई। तड़के सुबह से ही जनपद के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र गूंजता रहा। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव के दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पवित्र सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान और पूजन के बाद भक्त प्राचीन नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वर नाथ सहित प्रमुख मंदिरों में जलाभिषेक किया। मान्यता है कि नागेश्वर नाथ की स्थापना श्रीराम के पुत्र कुश ने प्राचीन मंदिर की स्थापना की थी। सावन के आखिरी सोमवार को नागेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

वहीं क्षीरेश्वरनाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर की स्थापना स्वयं चक्रवर्ती राजा दशरथ ने कराया था, इसके बाद स्वयं प्रभु श्रीराम, माता सीता सहित अयोध्या वासी यहाँ दर्शन पूजन को आते थे। इसी मान्यता के चलते सावन के आखिरी सोमवार को क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
भक्तों ने बेलपत्र, फूल, दूध और गंगाजल अर्पित कर भगवान शिव का पूजन किया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से मंदिर में प्रवेश की चरणबद्ध व्यवस्था की गई। पुलिस बल की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग और विशेष निगरानी के इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया गया, जिससे दर्शन-पूजन के दौरान व्यवस्था बनी रहे।
सावन के अंतिम सोमवार पर सरयू तट से लेकर शिवालयों तक श्रद्धा का अलग ही रंग देखने को मिला। हर तरफ भगवान शिव के जयकारे और भक्तिमय वातावरण ने रामनगरी को शिवमय बना दिया
