
बिजली व्यवस्था की बदहाली: बदहाली का दंश झेल रहे अयोध्या नगर निगम के विस्तारीकरण में जोड़े गए 41 गांव…
मानक से अधिक 60 मीटर की जगह 100 से 200 मीटर लंबी केबल बनी खतरा….
अयोध्या। नगर निगम अयोध्या का विस्तारीकरण हुआ, जिसमें 41 राजस्व गांव को जोड़ा गया। लेकिन नगर निगम क्षेत्र में होने के बावजूद इन नए वार्डों में विकास आज भी कोसों दूर है। सबसे बड़ी समस्या की बात की जाए तो वह है बिजली व्यवस्था….! विद्युत विभाग ने नए बने मकान और कालोनियों में कनेक्शन तो दिया, लेकिन जहां विभाग की तरफ से 60 मीटर केबल से कनेक्शन देने का मानक रखा गया है, वही विभाग ने 100 से 200 मीटर लंबी केवल लगाकर बिजली कनेक्शन दिया है, जो खतरे का सब बना हुआ है।

पल्स 24×7 की टीम जनपद के गद्दोपुर मझवा कॉलोनी पहुंची, जहां करीब 100 से 200 मीटर लंबी केबल के जरिए दर्जनों कनेक्शन दिए जाने की बात सामने आई है। जिस इलाके में यह केबल लगी है, वहां छोटे बच्चे भी खेलते हैं और लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सवाल है कि आखिर बिजली विभाग ने किस तकनीकी मानक के तहत यह कनेक्शन दिया और क्या इसकी सुरक्षा जांच की गई? कॉलोनी वासियों का आरोप है कि आए दिन केबल गर्म होकर टूट जाती है, जिससे जहां एक तरफ दो से तीन दिनों तक बिजली और पानी के संकट से जूझना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ बच्चों और जानवरों के लिए खतरा भी बना रहता है।
कालोनी वासी डॉ एसपी सिंह ने बताया की बिजली विभाग ने मानक से ज्यादा लंबी केबिल लगाकर कनेक्शन तो दे दिया है, लेकिन आए दिन केबल टूट जाती है, जिससे जानवरों और बच्चों के लिए खतरा बना रहता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय निवासी विष्णु प्रताप यादव कहा कि आए दिन केबल टूट जाती है, बिजली विभाग वाले आते हैं 100-200 लेते हैं और केबल जोड़कर चले जाते है। लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिल पा रहा है।
रमाकांत यादव ने बताया कि हमारे यहाँ इस श्रीराम कॉलोनी में जितने मकान मालिक हैं, उनके लिए बिजली की समस्या 4 साल से चल रही है। हम लोग यहाँ के लोकल प्रशासन को सूचनाएँ दे-देकर परेशान हो गए, लेकिन आज तक मेरी लाइट ठीक नहीं हुई, न कोई खंभा है। दूर-दूर से तीन-तीन बंडल केबल लगा करके हम लोग किसी तरीके से लाइट लाए हैं। कहीं आज केबल यहाँ कट जा रही, कहीं केबल वहाँ कट जा रही, कहीं खंभा नहीं है, कहीं क्या नहीं है, सारी समस्याएँ हम लोग झेल रहे हैं।
कॉलोनी में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों को लेकर है। इलाके में नन्हे-मुन्ने बच्चे अक्सर घरों के बाहर और आसपास खेलते हैं। ऐसे में बिजली की केबल अगर नीचे लटक रही हो, जमीन के नजदीक हो या किसी जगह से क्षतिग्रस्त हो जाए, तो खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि बिजली विभाग ने यहां कनेक्शन देने से पहले क्या मौके का निरीक्षण किया? क्या केबल की लंबाई, ऊंचाई, इंसुलेशन और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई? और सबसे अहम… क्या यह पूरा कनेक्शन निर्धारित विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुरूप है? समस्याओं को लेकर कॉलोनी वासियों ने आलाधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत की है, लेकिन समस्या आज भी जस की तस्वीर बनी हुई है।
मझवा गद्दोंपुर निवासी हरि प्रसाद पाठक ने बताया कि यहाँ पर कनेक्शन लिया गया है। उस समय अवर अभियंता मुझसे सुविधा शुल्क लेके मेरी केबल खींच दिए। उस समय मैंने बाँस गड़वाया था। बाँस गड़वाने के बाद जब जानवर उससे भिड़ जाते थे, तो वह टूट जाता था, तो केबल नीचे आ जाती थी। किसी भी समय जानवर या बच्चों से खतरा बना रहता था, फिर हम कॉलोनी वालों ने चंदा लगा के 3000 रुपये मे पिलर खरीदे, 2000 भाड़ा देके ट्राली से लाद के लाए और 1000 देके पिलर मैंने गड़वाया। गड़वाने के बाद अब इस लाइन को मैंने खंभे में बाँध दिया। अब सहायक अभियंता, अवर अभियंता, अधिशासी अभियंता ये लोग कहते हैं कि यह अनर्गल है। अगर अनर्गल है, तो लाइन हमको क्यों दी गई? यहाँ दो-दो बंडल, तीन-तीन बंडल जो खींचा गया है, यह तार क्यों खींचा गया? उन्होंने बताया कि लाइनमैन आता है, प्रोसीजर करता है। लाइनमैन कहता है कि सुविधा शुल्क दे दीजिए, रुपये लेकर फॉरवर्ड कर दिया कि 60 मीटर केबल लगा है और यहाँ मौके पर आप निरीक्षण करिए, दो बंडल, तीन बंडल केबल लगे हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, बिजली विभाग और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो अब बिजली विभाग उल्टा केबल लगाने के लिए हमसे ही पैसा मांग रहे है और हमलोग का कनेक्शन अवैध बता रहे हैं।
