राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपी लवकुश मिश्रा की बढ़ीं मुश्किलें, निर्माणाधीन मकान पर ADA का अंतिम नोटिस

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लवकुश मिश्रा का निर्माणाधीन मकान

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपी लवकुश मिश्रा की बढ़ीं मुश्किलें, निर्माणाधीन मकान पर ADA का अंतिम नोटिस, 15 जुलाई तक दिया जवाब का मौका

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें अब कानूनी जांच के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी बढ़ती नजर आ रही हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने लवकुश मिश्रा के निर्माणाधीन मकान को लेकर अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक स्वीकृत मानचित्र या अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए तो नियमानुसार भवन को सील करने सहित अन्य कार्रवाई की जाएगी।

एडीए की ओर से जारी नोटिस सुप्रिया मिश्रा, पत्नी लवकुश मिश्रा के नाम संबोधित है। यह निर्माण गाटा संख्या-16ग,  मौजा वनवीरपुर, जनपद अयोध्या में स्थित है। प्राधिकरण के अनुसार यह मामला वाद संख्या-53/2026 (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-AFDA/Z1/ANI/2026/0001449) से संबंधित है।

प्राधिकरण के रिकॉर्ड के मुताबिक इस प्रकरण में पहले 3 जुलाई 2026 की तारीख नियत की गई थी। उस दिन न तो सुप्रिया मिश्रा स्वयं उपस्थित हुईं और न ही निर्माण से संबंधित कोई जवाब, स्वीकृत मानचित्र अथवा शमन मानचित्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद अब एडीए ने इसे अंतिम अवसर मानते हुए 15 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है।

विकास प्राधिकरण की नोटिस

अंतिम नोटिस में निर्देश दिया गया है कि 15 जुलाई को पूर्वाह्न 11 बजे अधोहस्ताक्षरी के समक्ष उपस्थित होकर निर्माण से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। यदि निर्धारित तिथि पर भी कोई जवाब या वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए तो प्राधिकरण उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के प्रावधानों के तहत सीलिंग सहित नियमानुसार कार्रवाई करेगा।

प्राधिकरण ने नोटिस में साफ तौर पर कहा है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराने की स्थिति में भवन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सभी की निगाहें 15 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

सूत्रों के अनुसार यदि सुप्रिया मिश्रा की ओर से इस अंतिम नोटिस का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निर्माणाधीन भवन को पहले सील किया जा सकता है। इसके बाद नियमानुसार अवैध निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण (बुलडोजर) जैसी कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय दस्तावेजों की जांच और प्राधिकरण की विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

गौरतलब है कि लवकुश मिश्रा राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपियों में शामिल हैं। इस बहुचर्चित मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की लगातार जांच जारी है। इसी बीच अब आरोपी से जुड़े निर्माणाधीन भवन पर एडीए की कार्रवाई ने मामले को नया आयाम दे दिया है।

अयोध्या विकास प्राधिकरण की इस कार्रवाई को अवैध निर्माणों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा भी माना जा रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। यदि निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए जाते हैं तो उनका परीक्षण किया जाएगा,  अन्यथा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 15 जुलाई को सुप्रिया मिश्रा की ओर से कोई जवाब या स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत किया जाता है या नहीं। यदि ऐसा नहीं होता है तो एडीए की ओर से निर्माणाधीन भवन पर सीलिंग की कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है, जिसके बाद आगे की विधिक प्रक्रिया के तहत अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।


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