
श्रीराम राखी पर्व 2026 को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारी शुरू, संस्थान की बैठक में बनी रूपरेखा
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक, पदाधिकारियों ने पीठाधीश्वर सीताराम दास का लिया आशीर्वाद
अयोध्या। श्रीराम राखी पर्व को भव्य एवं ऐतिहासिक बनाने को लेकर रविवार को श्री श्रृंगी ऋषि बाबा महोत्सव सेवा संस्थान की एक बैठक आयोजित की गई। जिसका शुभारंभ पीठाधीश्वर सीताराम दास ने मंत्रोच्चार के साथ किया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई इस बैठक में संस्थान के समस्त पदाधिकारी एवं आयोजन समिति के सदस्य सम्मिलित हुए और पर्व को सफल बनाने का संकल्प लिया। पीठाधीश्वर सीताराम दास ने बताया कि जब भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर दानवीर राजा बलि के पास गए, तो बलि ने उन्हें पाताल लोक का द्वारपाल बना लिया। अपने पति विष्णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी ने एक साधारण स्त्री का रूप धारण किया उन्होंने राजा बलि को भाई मानकर रक्षा-सूत्र (राखी) बांधा और उपहार के रूप में अपने पति विष्णु को मुक्त करवा लिया। इसी तरह से आज जब हमारे प्रभु आराध्य भगवान रामलला का 500 सालों के संघर्ष के बाद भव्य और दिव्य मंदिर बनाकर के तैयार हो गया है, तो माता शांता जी जो भगवान श्री राम की बड़ी बहन है अपने भाई राम को और उनके अनुजों को रक्षा सूत्र भेजती हैं। जो कि धार्मिक मान्यता भी है, तो हम लोगों को इस पर्व को पूरे देश और विश्व में किस प्रकार से चर्चा हो पूरे विश्व में विख्यात हो इसकी पूरी तैयारी करनी है, एक रूपरेखा तैयार करना है, हम सभी आज से ही लग जाए जिससे कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके। क्योंकि इस कार्यक्रम को क्षेत्र से ही लेकर पूरे देश के लोगों की निगाह टिकी रहती है।
बैठक की अध्यक्षता के रहे मुख्य संरक्षक प्रदीप जायसवाल ने कहा कि श्री राम राखी पर्व को लेकर समूचे राष्ट्र में उत्साह है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक है। 2026 में इसे अभूतपूर्व स्वरूप दिया जाएगा। बैठक में शामिल शशि प्रभा सिंह, अंजलि सिंह, विमल गुप्ता, शमशेर, वैभव मिश्रा, उदय भान गुप्ता, लाल चंद्र अग्रहरि, जंगजीत सिंह, शैलेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, शशि कसौधन, पंकज सिंह, रामजनम मांझी, मधुबन सिंह, राजेश कुमार उपस्थित रहे ।
बैठक में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा हुई
बैठक में श्रावण पूर्णिमा पर होने वाले मुख्य आयोजनों का प्रारूप तय किया गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात, आवास एवं प्रसाद वितरण हेतु समितियों के गठन पर सहमति बनी। अनुमानित बजट पर चर्चा कर आर्थिक सहयोग हेतु रूपरेखा बनाई गई। 15 दिन में विभागवार कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
