
आयुर्वेद दिवस पर कनीगंज में जन-स्वास्थ्य का महाअभियान, निःशुल्क जांच-उपचार के साथ बांटे गए औषधीय पौधे
अयोध्या। उत्तर प्रदेश शासन के दिशा-निर्देशों, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी अयोध्या के आदेश और मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयुष विभाग अयोध्या की ओर से बुधवार को राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय (25 शैय्या), कनीगंज के परिसर में 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में आमजन को आयुर्वेद, योग और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के साथ निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, उपचार, परामर्श और औषधीय पौधों का वितरण किया गया।
इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम “One Health, One Future: Integrating Ayurveda Science through Evidence, Innovation and Holistic Care” और “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” रही। आयोजन का उद्देश्य आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी रहे। कार्यक्रम का संयोजन क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह ‘विष्णु’ ने किया। इस दौरान योग प्रशिक्षकों और योग सहायकों ने सामूहिक योगाभ्यास तथा विभिन्न योगासनों का प्रदर्शन किया। नागरिकों, छात्र-छात्राओं और क्षेत्रवासियों ने इसमें उत्साह के साथ हिस्सा लिया तथा नियमित योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लिया।
आयुर्वेद दिवस के मुख्य आयोजन से पहले जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राम चौपाल, जन-जागरूकता कार्यशालाओं और औषधीय पौधारोपण अभियानों के जरिए लोगों को आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। चिकित्साधिकारियों ने ग्रामीणों को आयुर्वेद, आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या और औषधीय पौधों के रोपण एवं संरक्षण की जानकारी दी।
ग्राम सभा अमसिन के पंचायत सभागार में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह ‘विष्णु’ और फार्मासिस्ट अशोक कुमार वर्मा ने ग्रामीणों को साक्ष्य आधारित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों तथा स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दी। विभिन्न स्थानों पर नीम, एलोवेरा, शतावरी, तुलसी और गिलोय जैसे औषधीय पौधों का रोपण भी किया गया।
कनीगंज में आयोजित स्वास्थ्य मेले में आयुर्वेद, यूनानी, पंचकर्म, प्रकृति परीक्षण, जालौका चिकित्सा, अग्निकर्म चिकित्सा, जीवनशैली संबंधी रोगों की रोकथाम और बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। आयुर्वेद चिकित्सा शिविर में डॉ. मिथलेश कुमार वर्मा, डॉ. अमृता सिंह और डॉ. सरिता त्रिपाठी ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर चिकित्सीय परामर्श दिया।
डॉ. मोहिनी सिंह ने रसायन चिकित्सा के बारे में जानकारी देते हुए रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य संरक्षण के उपाय बताए। यूनानी चिकित्सा शिविर में डॉ. आदित्य प्रकाश और डॉ. तसलीम ने मरीजों की जांच एवं उपचार किया। डॉ. रोमी गुप्ता ने रसोई में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न मसालों के औषधीय गुण और दैनिक जीवन में उनके महत्व की जानकारी दी।
जीवनशैली संबंधी रोगों की रोकथाम के लिए डॉ. हर्ष कुमार मिश्र और डॉ. राहुल सिंह ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव और असंतुलित खान-पान से बचाव के उपाय बताए। पंचकर्म परामर्श एवं प्रदर्शन के दौरान डॉ. गिरिजेश्वर उपाध्याय और डॉ. अशफाक ने पंचकर्म की विभिन्न शोधन विधियों की उपयोगिता समझाई और उनका प्रदर्शन किया।
प्रकृति परीक्षण शिविर में डॉ. धर्मेन्द्र कुमार वर्मा और डॉ. कविता निगम ने नागरिकों की वात, पित्त और कफ प्रकृति का परीक्षण कर उनके अनुरूप आहार एवं जीवनशैली संबंधी जानकारी दी। बच्चों के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखते हुए आमंत्रित चिकित्सक डॉ. लवकुश निगम द्वारा स्वर्ण प्राशन कराया गया। स्वास्थ्य मेले में लाभार्थियों को निःशुल्क औषधियां भी वितरित की गईं।
नर्सिंग स्टाफ ने लोगों की ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन की निःशुल्क जांच की। वहीं, वन विभाग के सहयोग से आयोजित औषधीय पौधा वितरण कार्यक्रम में तुलसी, गिलोय, नीम, कालमेघ, सहजन और अश्वगंधा समेत कई उपयोगी पौधे लोगों को निःशुल्क वितरित किए गए। लोगों को पौधों के रोपण, संरक्षण और उनकी उपयोगिता के बारे में भी जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने आयुष विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयुर्वेद को आमजन तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने नागरिकों से आयुर्वेद, योग और स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह ‘विष्णु’ ने जिला प्रशासन, वन विभाग, चिकित्सकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, योग प्रशिक्षकों और कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
