
अधिवक्ताओं का प्रदर्शन: जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग
बीकापुर। जातिगत आरक्षण के विरोध, यूसीजी एक्ट को वापस करने तथा एससी एसटी एक्ट को समाप्त करने के लिए जंतर मंतर दिल्ली पर हो रहे प्रदर्शन के समर्थन में अधिवक्ता संघ बीकापुर द्वारा भी मंगलवार को हुंकार भरी गई तथा बार एसोसिएशन बीकापुर के अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में इकट्ठा होकर नारेबाजी भी की गई।
जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शन के समर्थन में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय मांग पत्र उप जिलाधिकारी संतोष कुमार को दिया गया। बार एसोसिएशन बीकापुर के अध्यक्ष वंशीधर शुक्ल और मंत्री राम सिंह यादव ने कहा कि जंतर मंतर दिल्ली पर चल रहे आरक्षण व्यवस्था पर यूजीसी वापस लेने एवं सामाजिक न्याय को लेकर देश भर में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन हो रहे हैं।
प्रदर्शन कारियों पर बर्बरता पूर्ण व्यवहार एवं उत्पीड़न किया जा रहा है तथा उनकी आवाज को दबाने का प्रयास बलपूर्वक किया जा रहा है। जो देश के संविधान एवं लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के विरुद्ध है। यह आंदोलन यूजीसी आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने के लिए किया जा रहा है जनका वह समर्थन करते हैं। कहा कि आरक्षण व्यवस्था अब अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं कर रही है जिससे समानता के अधिकार का हनन हो रहा है।
वर्तमान में एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। निर्दोश लोगों विशेष कर सामान्य वर्ग के लोगों को झूठे मुकदमों में फसाया जा रहा है। अभी तक लागू आरक्षण व्यवस्था जातिगत आधार पर लागू है जबकि गरीब व्यक्ति हर वर्ग में मौजूद है जातिगत आरक्षण की समीक्षा जरूरी हो गई है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे गए पांच सूत्रीय मांग पत्र में वर्तमान में विचाराधीन यूजीसी एक्ट को वापस लेने, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाप्त करके आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू किए जाने, सामान्य वर्ग हेतु सवर्ण आयोग का गठन किए जाने, जंतर मंतर अथवा देश में कहीं भी किये जा रहे शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कारियों पर बर्बरता पूर्वक कार्यवाही न की जाए बल्कि उनकी मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार किए जाने की मांग शामिल है।
इस मौके पर प्रदर्शन के दौरान पूर्व अध्यक्ष तुलसीराम तिवारी, आबाद अहमद खा, प्रमोद शर्मा, उमेश पांडेय, राम सजीवन पांडेय, बृजेश तिवारी, सदानंद पाठक, अरुण मिश्रा, पुष्पेंद्र मिश्रा, आलोक सिंह, अशोक सिंह, दिनेश पांडेय, बृजेश यादव, बलराम यादव, शक्ति सिंह, शिखा सिंह, कालिंदी पाल, राहुल शर्मा, आदित्य श्रीवास्तव, संजय पांडेय सहित तहसील के दर्जनों अधिवक्ता शामिल रहे।

