
मोहर्रम: खजूर की मस्जिद से उठा अलम-ए-मुबारक, या हुसैन की सदाओं से गूंजा शहर
अयोध्या: इस्लामी महीने मोहर्रम की 3 तारीख को शुक्रवार रात शहर में गम-ए-हुसैन की तस्वीर नजर आई। खजूर की मस्जिद से अलम-ए-मुबारक उठने के बाद मजलिस के बाद पुरअमन जुलूस-ए-अलम बरामद हुआ।
जुलूस में शहर की मशहूर अंजुमनों ने बढ़-चढ़कर शिरकत की। अंजुमन मासूमिया, अंजुमन इमामिया जाफरिया, अंजुमन नासीरिया, अंजुमन बज़्मे नासीरिया और अंजुमन गुनच-ए-मज़लूमिया के अजादारों ने काला लिबास पहनकर नौहा और मर्सिया पढ़ते हुए चौक से जुलूस निकाला। सड़कों पर हर तरफ या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।

जुलूस परंपरागत मार्ग से होता हुआ रिकाबगंज स्थित मरहूम रमज़ान साहब के दौलतकदे पर जाकर समाप्त हुआ, जहां मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में मौलाना ने कर्बला के वाकये और हज़रत इमाम हुसैन की कुर्बानी पर रोशनी डाली। प्रशासन ने जुलूस मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
पुलिस, पीएसी और मजिस्ट्रेट तैनात रहे। विद्युत विभाग ने रास्ते की लाइटें दुरुस्त कीं। अजादारों ने बताया कि मोहर्रम हमें इंसानियत, हक और इंसाफ का पैगाम देता है। जुलूस में मुख्य रूप से सेक्रेटरी गुंचे मजलूमिया जियो हैदर सदर कामिल हसनैन, वसी हैदर गुड्डू, मुनीर आबिदी, शमशीर अब्बास, सुहैल ज़ैदी, मोहम्मद हसनैन, हसन इकबाल, अरशद, ज़फ़र अब्बास समेत बड़ी तादाद में अजा़दार शामिल रहे।

