
Weather News: मानसून की रफ्तार क्यों थमी? अल नीनो समेत 5 मौसमीय प्रणालियों ने बढ़ाई किसानों की चिंता
अयोध्या। जेठ माह अपने समापन की ओर है। मानसून को चार दिन पूर्व ही देशभर में अपनी सक्रियता दिखानी थी लेकिन यह दक्षिण के राज्य तेलंगाना में थम गया है। उत्तर भारत के राज्यों में इस बार प्री मानसून में भी अपेक्षित बरसात नहीं हुई। जिसके कारण किसान भविष्य को लेकर परेशान और हलकान हैं। वहीं गर्मी के प्रकोप को लेकर आमजन परेशान हैं।
भारतीय मौसम विभाग की मानें तो इस बार अभी तक देश में सामान्य से लगभग 40 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके पीछे केवल अल नीनो का प्रभाव ही नहीं बल्कि एक साथ सक्रिय पांच मौसमीय प्रणालिया हैं,जिन्होंने मानसून का संतुलन बिगाड़ रखा है।
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देशभर में मानसून की रफ्तार इस समय असामान्य परिस्थितियों से गुजर रही है। सामान्यतः जून के मध्य तक देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो जाने वाला मानसून इसी कारण 15 दिनों में 19 राज्यों तक मानसून की दस्तक के बावजूद यह 8 जून से तेलंगाना के आसपास ठिठका हुआ है।लगभग 11 दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई का समय शुरू हो चुकी है,इसके कारण मानसून कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में मानसून की गति नहीं बढ़ी तो कृषि उत्पादन, जल भंडारण और पेयजल आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
इन पांच प्रमुख मौसमी प्रणालियां (Weather Systems) ने थाम रखी है मानसून की रफ्तार की रफ्तार थमने (Monsoon Break) के पीछे वास्तव में एक साथ जिम्मेदार हैं, जो मानसून की हवाओं को कमजोर कर रही हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और मौसम विज्ञानियों के अनुसार, केरल में 4 जून को दस्तक देने और शुरुआती तेजी दिखाने के बाद मानसून अचानक महाराष्ट्र और बिहार के पास आकर रुक गया है। इन प्रमुख कारण से दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं कमजोर हुई हैं।
अल नीनो (El Niño) का प्रभाव
प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो रहा है। हालांकि जून में यह कमजोर स्थिति में है, लेकिन यह वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर उच्च दबाव का क्षेत्र बना रहा है, जिससे मानसूनी हवाओं की तीव्रता कम हुई है।
प्रशांत विक्षोभ और टाइफून ‘जग्मी’ (Pacific Disturbances)
पश्चिमी प्रशांत महासागर में चक्रवातीय गतिविधियां और तूफान (जैसे टाइफून जग्मी) सक्रिय हो गए हैं। इस वजह से हिंद महासागर से उठने वाली नमी और वायुमंडलीय ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा भारत के बजाय पूर्व की ओर (प्रशांत महासागर की तरफ) डाइवर्ट हो गया है, जिससे बंगाल की खाड़ी में जरूरी सिस्टम नहीं बन पा रहे हैं।
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances)
उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर सबट्रॉपिकल वेस्टरली जेट स्ट्रीम की मौजूदगी के कारण लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं। इनसे निकलने वाली सूखी और ठंडी हवाएं उत्तर और मध्य भारत की ओर आ रही हैं, जो मानसूनी हवाओं के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने में एक बड़ी बाधा (Barrier) का काम कर रही हैं।
कमजोर मैडेन-जूलियन दोलन (Weak MJO)
मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (बादलों और बारिश की एक वैश्विक घूमती प्रणाली) वर्तमान में हिंद महासागर में एक प्रतिकूल (Unfavourable) चरण में है। जब एमजेओ इस स्थिति में होता है, तो यह भारत के मुख्य मानसून क्षेत्र में संवहन (Convection) और बादलों के बनने की प्रक्रिया को दबा देता है।
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्रों का न बनना
मानसून को भारत के आंतरिक हिस्सों (मध्य और उत्तर भारत) में धकेलने के लिए बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Systems) या डिप्रेशन का बनना बेहद जरूरी होता है। वर्तमान में मानसूनी हवाएं घुमावदार (Converging) होने के बजाय बिल्कुल सीधी और समानांतर (Straight West-to-East) चल रही हैं, जिससे चक्रवातीय परिसंचरण नहीं बन पा रहा है और मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके अलावा, अरब सागर की तरफ से आने वाली सोमाली जेट स्ट्रीम (Somali Jet) का कमजोर होना भी हवाओं में नमी की कमी का एक अतिरिक्त कारण बना हुआ है।

