राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस नेता का बड़ा आरोप, ट्रस्ट को भंग कर सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग

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प्रेस वार्ता करते कांग्रेस नेता शरद शुक्ला

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: दम कदम पर ठगते रहे आस्था और श्रद्धा के नाम पर सरकारी रेट से कई गुना ज्यादा में खरीदी जमीन, विवादित का भी लिया बैनामा-शरद शुक्ला 

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अनियमितता के मामले की फेहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। रामलला के चढ़ावे में चोरी और बेईमानी के प्रकरण की सरगर्मी के बीच नित नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। ट्रस्ट के खिलाफ कृषि और आवासीय भूमि को बाजार रेट से कई गुना अधिक मूल्य का भुगतान देकर खरीदने और राम के नाम पर मिले रकम में बंदरबांट का आरोप लगा है।

प्रदेश की एसआईटी जांच पर अविश्वास जताते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को तत्काल भंग कर पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट से जांच करने की मांग उठी है।

बुधवार को सिविल लाइन क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में युवक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने आरोप लगाया कि आपसी मिली भगत और मंदिर निर्माण के नाम पर मिले दान और चंदा में बंदर बांट के लिए ट्रस्ट की ओर से जमीनों को कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने वर्ष 2023 के नवंबर माह में प्रदेश सरकार की ओर से अधिग्रहण के लिए अधिसूचित शाहनेवाजपुर माझा गांव में शहर के झारखंडी निवासी आलोक बंसल और उनके परिवार से 14730 वर्ग मीटर जमीन कल 55 करोड़ 47 लाख 31 हजार 800 में खरीदी। जबकि इसका सर्किल रेट के मुताबिक बाजार मूल्य केवल नौ करोड़ एक हजार रुपए था।

यही नहीं उसी दिन आलोक बंसल के भाई की पत्नी से ट्रस्ट ने एक और जमीन का बैनामा कराया। यह बैनामा उसी ग्राम सभा की 0.7880 हेक्टर कृषि भूमि का हुआ था। जिसका बाजार मूल्य डेढ़ करोड़ रुपए से कम होने के बावजूद सौदा 29 करोड़ 67 लाख 60 हजार 800 रुपए में किया गया।

खास बात यह रही कि इस जमीन से जुड़ा विवाद हाई कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से जमीन का कई गुना ज्यादा मूल्य भुगतान दिया गया। जबकि इसी के आसपास आवास विकास परिषद की ओर से किसानों से जमीन का अधिग्रहण किया गया है और आवास विकास की ओर से किसानों को चार से 6 लाख रुपए बिस्वा की दर से ही मुआवजा दिया गया। मगर राम मंदिर ट्रस्ट ने जमीन साढ़े 47 लाख रुपया प्रति बिस्वा की दर से खरीदी।

उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट बनने के बाद जमीन खरीद के नाम पर कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ ही पलों में दो करोड़ रुपए कीमत की जमीन का ट्रस्ट की ओर से 18 करोड़ रुपए में बैनामा लिए जाने का मामला प्रकाश में आया था।

प्रकरण चर्चा में आने के बाद सरकार की ओर से जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी लेकिन जांच में क्या निकला?आज तक किसी को कुछ पता नहीं चला। वर्तमान में 89 विशेष जांच दल कार्य कर रहे हैं,लेकिन कुछ परिणाम सामने नहीं आ रहा। चंदा चोरी के लिए गठित विशेष जांच दल से भी कुछ हासिल होने की उम्मीद नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से ट्रस्ट का गठन किया गया था और यह ट्रस्ट लगातार लोगों का भरोसा खोता जा रहा है। जब इसमें लोगों का विश्वास हीं नहीं बचा तो इसको तत्काल भंग कर सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में पूरे मामले की विस्तृत जांच करानी चाहिए,जिससे दोषियों को दंड मिल सके और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम पर गठित ट्रस्ट पर आस्था व श्रद्धा को अक्षुण्ण रखा जा सके।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में शामिल लोग पहले से आस्था व श्रद्धा को ठगते रहे है। राम की मूर्ति निर्माण के लिए नेपाल के गंडकी नदी से शिलाग्राम की बड़ी चट्टान मंगाई गई थी। जगह जगह इसकी पूजा अर्चना कराई गई और चढ़ावा लिया गया। फिर अचानक कर्नाटक और उड़ीसा के पत्थर से राम की मूर्ति बनवा ली गई।


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