सरकारी आवास योजना का सच: सोशल मीडिया पर गूंजी आवाज तो जागी व्यवस्था, तत्काल मिला आवास…!

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सांकेतिक फोटो

सरकारी आवास योजना का सच: सोशल मीडिया पर गूंजी आवाज तो जागी व्यवस्था, तत्काल मिला आवास…!

जनपद में हजारों बेघर पात्रों को अब भी आवास का इंतजार…

‘हर सिर को छत’ के दावों पर सवाल, झोपड़ियों में जिंदगी गुजार रहे सैकड़ों पात्र

​बीकापुर, अयोध्या। ग्राम पंचायत खजुरहट के मजरे बरगदिया निवासी अर्पिता पाण्डेय के घर स्थानीय विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान का पहुंचना और राशन सहित जरूरी मदद उपलब्ध कराना प्रशासनिक स्तर पर एक सराहनीय पहल जरूर है, लेकिन यह मामला बीकापुर विकासखंड में केवल एक नजीर भर है। आज भी जनपद में हजारों ऐसे परिवार हैं जिनको पत्र होने के बावजूद सरकारी आवास का इंतजार है।

​सोशल मीडिया पर जब इस असहाय परिवार की लाचारी सामने आई, तब जनप्रतिनिधियों और तहसील प्रशासन ने सक्रियता दिखाई और मौके पर पहुंचकर राहत सामग्री दी। मगर जमीन पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए हर पात्र व्यक्ति को सोशल मीडिया पर गुहार लगानी पड़ेगी?

सैकङो परिवार आवास से वंचित….!

जनपद की लगभग हर ग्राम पंचायत में आज भी दर्जनों ऐसे अत्यंत गरीब और पात्र परिवार हैं, जो झोपड़ियों और कच्चे मकानों में गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। कागजों पर ‘हर सिर को छत’ देने के दावे तो बहुत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन पात्रों को अब तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है।

सोशल मीडिया पर ही क्यों एक्शन….?

अर्पिता पाण्डेय के मामले ने यह साबित कर दिया कि जब मामला सार्वजनिक होकर चर्चा में आता है, तभी व्यवस्था हरकत में आती है। सवाल उन अनगिनत मूक आवाजों का है, जिनके पास न तो सोशल मीडिया की पहुंच है और न ही सिफारिश।

सर्वे और सत्यापन पर सवाल….

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायतों में आवास आवंटन के सर्वे में वास्तविक जरूरतमंद अक्सर छूट जाते हैं और अपात्र लाभ ले जाते हैं। क्षेत्र की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद एक परिवार को तो मदद मिल गई, लेकिन ब्लॉक की बाकी ग्राम पंचायतों में सालों से आवास सूची में नाम आने का इंतजार कर रहे अन्य गरीबों की सुध प्रशासन कब लेगा?

 


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