राम मंदिर ट्रस्ट बैठक: दानपात्र अनियमितता मामले में राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला, नए महामंत्री बनने तक कृष्ण मोहन संभालेंगे जिम्मेदारी

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राम मंदिर ट्रस्ट बैठक: चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार, दानपात्र मामले में एसआईटी जांच तेज

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को राम मंदिर परिसर में सम्पन्न हुई। बैठक में दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं, उसकी जांच, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफों, मीडिया में चल रही चर्चाओं तथा मंदिर की भावी प्रशासनिक व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कई अहम निर्णयों की जानकारी दी गई।

बैठक में दानपात्र अनियमितता प्रकरण के मद्देनजर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र द्वारा नैतिक आधार पर दिए गए इस्तीफों पर विचार किया गया। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इसके साथ ही ट्रस्ट ने गोपाल राव का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का भी निर्णय लिया।

ट्रस्ट ने अपने बयान में कहा कि वर्ष 2020 में स्थापना के बाद छह वर्ष से भी कम समय में प्रभु श्रीरामलला के भव्य मंदिर के निर्माण का ऐतिहासिक कार्य पूरा किया गया। इसी अवधि में मुख्य मंदिर एवं परकोटे में स्थित सभी मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण और श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य भी शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुए। ट्रस्ट ने इस उपलब्धि के लिए देशभर के श्रद्धालुओं, निधि समर्पण अभियान में सहयोग करने वाले दानदाताओं, अभियंताओं, शिल्पकारों, वास्तुविदों, श्रमिकों तथा केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में ट्रस्ट ने वित्तीय स्थिति का भी विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। ट्रस्ट के अनुसार निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान के माध्यम से कुल 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत कार्यों पर व्यय किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त स्थापना से लेकर 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं के चढ़ावे के रूप में कुल 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इनमें से 391 करोड़ रुपये संचालन संबंधी खर्चों पर उपयोग किए गए हैं, जबकि शेष राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि इन वित्तीय आंकड़ों की जानकारी समय-समय पर मीडिया और जनसामान्य के समक्ष प्रस्तुत की जाती रही है।

दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं पर ट्रस्ट ने गहरा दुख और चिंता व्यक्त की। ट्रस्ट ने कहा कि जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, अधिकारियों ने प्रारंभिक तथ्यों का संकलन कर उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया। ट्रस्ट के आग्रह पर राज्य सरकार ने तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष, व्यापक और तथ्यपरक जांच हो सके।

ट्रस्ट के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आठ लोगों के नाम सामने आए, जिनके विरुद्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने पर मुकदमा दर्ज कराया गया और उनकी गिरफ्तारी भी की गई। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है तथा जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ट्रस्ट का कहना है कि एसआईटी का कार्य केवल दोषियों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार संबंधी सुझाव देना भी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

बैठक में मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया गया। ट्रस्ट ने निर्णय लिया कि एसआईटी की अनुशंसाओं के अतिरिक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों से भी सुझाव लिए जाएंगे, ताकि मंदिर प्रशासन की ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सके जो पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सके।

महामंत्री के पद पर नई नियुक्ति होने तक ट्रस्ट ने ट्रस्टी कृष्ण मोहन को महामंत्री के दायित्वों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। वहीं नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा सुरेश हावड़े शामिल होंगे। समिति योग्य उम्मीदवारों के नाम ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

बैठक में श्रद्धालुओं द्वारा वस्तु के रूप में दी गई भेंटों की व्यवस्था पर भी जानकारी दी गई। ट्रस्ट के अनुसार अब तक कुल 2,926 भेंटें प्राप्त हुई हैं, जिनका पूरा विवरण तिथि सहित रजिस्टर में दर्ज है। इन सभी का प्रतिवर्ष स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाता है। चांदी से बनी वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल में गलाकर चांदी की छड़ों में परिवर्तित किया गया है, जिनका पूरा रिकॉर्ड, फोटो, वजन तथा शुद्धता प्रमाणपत्र सुरक्षित रखा गया है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से कहा कि यदि कोई अपनी भेंट का सत्यापन करना चाहता है तो वह पूर्व निर्धारित समय लेकर अयोध्या आ सकता है।

ट्रस्ट ने पत्रकारों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि किसी के पास मंदिर से जुड़े किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध अनियमितता के ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय सीधे एसआईटी अथवा संबंधित जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाए। ट्रस्ट का कहना है कि जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करेंगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

बैठक में ट्रस्ट ने हाल के दिनों में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से चलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार पर भी चिंता व्यक्त की। ट्रस्ट का कहना है कि कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण का उपयोग श्रीराम जन्मभूमि, रामलला मंदिर और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। बिना प्रमाण लगाए जा रहे आरोपों का उद्देश्य सत्य सामने लाना नहीं, बल्कि भ्रम फैलाना है।

ट्रस्ट ने अंत में कहा कि तमाम विवादों और दुष्प्रचार के बावजूद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान श्रीरामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास आज भी पहले की तरह अटूट और अडिग है।


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