चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वालों को अयोध्या मेयर की सलाह, बोले-जनसमर्थन के जरिए सत्ता की राह तलाशें

Spread the love

चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वालों को अयोध्या मेयर की सलाह,बोले- जनसमर्थन के जरिए सत्ता की राह तलाशें

महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, राहुल गांधी के लिए अयोध्या से सद्बुद्धि की कामना की

अयोध्या। नगर निगम अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने चुनाव आयोग को लेकर लगातार सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल को जनसमर्थन हासिल कर सत्ता तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। देश में भ्रम और अराजकता का वातावरण बनाने से बचना चाहिए।

महापौर ने 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद से जुड़े सवालों को स्पष्ट किया है। चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि निर्वाचन संबंधी फैसले आयोग की सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि मतदाता सूची में आपत्तियों के निस्तारण की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया निर्धारित है। मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण का कार्य चुनाव आयोग समय-समय पर करता है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाने के बजाय जनता के बीच जाकर अपना आधार मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

महापौर ने अपने कांग्रेस छोड़ने की वजह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने की उनकी इच्छा थी, लेकिन कांग्रेस में रहते हुए ऐसा करने पर उन्हें पार्टी से बाहर किए जाने की आशंका थी। इसी कारण उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का फैसला किया।

राहुल गांधी को लेकर महापौर ने कहा कि वह अयोध्या और रामलला की धरती से उनके लिए सद्बुद्धि की कामना करते हैं।

महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि 1989 के बाद उत्तर प्रदेश, 1967 के बाद तमिलनाडु और 1975 के बाद पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी। उन्होंने कहा कि ऐसे राजनीतिक परिणामों के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के बीच काम करने और उनका विश्वास हासिल करने की जरूरत है।

गौरतलब है कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने एसआईआर, फॉर्म-6 और आयोग के कामकाज से जुड़े कई मुद्दों पर स्पष्टीकरण जारी किया था।

महापौर का बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग सुझाव या आपत्तियां आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।


Spread the love

Related posts