
धार्मिक आयोजन: गाथा पारायण उत्सव में बही भक्ति की रसधार
अयोध्या। रामनगरी में आयोजित हो रहे तुकाराम गाथा परायण उत्सव में महाराष्ट्र की प्रसिद्ध वारकरी परंपरा की भक्ति धारा बह रही है। इस उत्सव में भाग लेने के लिए पंढरपुर से राणा महाराज वासकर के नेतृत्व में महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक से लगभग 2500 श्रद्धालु यहां पहुंचे। यह आयोजन उनके पिता की पुण्यतिथि पर आयोजित हो रही है।
राणा महाराज वासकर ने बताया कि वारकरी संप्रदाय संत ज्ञानेश्वर महाराज, संत तुकाराम महाराज, संत एकनाथ महाराज और संत नामदेव महाराज की महान संत परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। इस उत्सव में संत तुकाराम महाराज के अभंगों का पाठ, भजन और कीर्तन आयोजित हो रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के इन महान संतों का संदेश मानवता, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश है, जिसे विश्व स्तर तक पहुंचाया जाना चाहिए। वारकरी समाज चाहता है कि संत परंपरा की यह अमूल्य धरोहर नई पीढ़ी तक पहुंचे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान बने।
परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की मांग
राणा महाराज वासकर ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज की पदयात्रा से जुड़कर इस परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि वारकरी संप्रदाय ने कभी सरकार से कोई विशेष अपेक्षा नहीं रखी, लेकिन वारकरी संतों के विचारों, शिक्षाओं और आध्यात्मिक विरासत का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया में होना चाहिए।
समाज को जोड़ने का कार्य करता है वारकरी संप्रदाय
उन्होंने कहा कि वारकरी संप्रदाय सभी सरकारों का सम्मान करता है और समाज को जोड़ने का कार्य करता है। अयोध्या की पावन धरती से उन्होंने देशवासियों और वारकरी समाज के लिए मंगलकामना करते हुए संत ज्ञानेश्वर महाराज की प्रार्थना दोहराई— दुरितांचे तिमिर जावो, विश्वस्व धर्म सूर्य पावो”, अर्थात संसार से अज्ञान और बुराइयों का अंधकार दूर हो तथा धर्म और सदाचार का प्रकाश फैलता रहे।

